पुणे/पिंपरी-चिंचवड़, नेशनल डेस्क : महाराष्ट्र के पुणे जिले के पिंपरी-चिंचवड़ में स्थित मोशी कचरा डिपो में पिछले चार दिनों से चल रहा जिंदगी और मौत का महा-अभियान आज सुबह (12 जुलाई 2026 को) समाप्त हो गया। लगातार 83 घंटों तक चले इस बेहद जटिल और खतरनाक रेस्क्यू ऑपरेशन के आखिरी चरण में मलबे से लापता कर्मचारी का शव बरामद किया गया है। इसके साथ ही इस भीषण हादसे में जान गंवाने वाले लोगों की कुल संख्या बढ़कर 9 हो गई है। यह हादसा तब हुआ जब भारी बारिश के चलते कचरे का एक विशाल पहाड़ भरभराकर पास ही बने तीन मंजिला प्रशासनिक भवन (Administrative Building) पर गिर गया।
कब, कहां और कैसे हुआ यह खौफनाक हादसा? (The Timeline)
- तारीख और समय (8 जुलाई, दोपहर 1:30 बजे): यह दर्दनाक हादसा बुधवार (8 जुलाई) को दोपहर के करीब 1:30 बजे हुआ था। मोशी स्थित वेस्ट-टू-एनर्जी (Waste-to-Energy) प्लांट के प्रशासनिक भवन में कई कर्मचारी पहली मंजिल पर बने कैंटीन में लंच कर रहे थे।
- कचरे का लैंडस्लाइड: पिछले तीन दिनों से पुणे और आसपास के इलाकों में लगातार मूसलाधार बारिश (650 मिलीमीटर से ज्यादा) हो रही थी। पानी के भारी रिसाव और मीथेन गैस के दबाव के कारण करीब 5 लाख टन कचरे का एक हिस्सा भूस्खलन (Landslide) की तरह खिसक गया और सीधे चमचमाती तीन मंजिला बिल्डिंग पर जा गिरा।
- इमारत का ढहना: कचरे के इस भारी दबाव के कारण पूरी इमारत ताश के पत्तों की तरह एक तरफ झुकते हुए ढह गई, जिससे वहां मौजूद 23 लोग मलबे और कचरे के ढेर के नीचे जिंदा दफन हो गए।
83 घंटे का रेस्क्यू ऑपरेशन: सेना और NDRF ने संभाला मोर्चा
हादसे की खबर मिलते ही नेशनल डिजास्टर रिलीफ फोर्स (NDRF), भारतीय सेना की साउदर्न कमांड, दमकल विभाग और स्थानीय पुलिस की टीमों ने युद्ध स्तर पर राहत कार्य शुरू किया।
- शुरुआती राहत: हादसे के तुरंत बाद 5 कर्मचारी किसी तरह खुद बाहर निकलने में कामयाब रहे, जबकि पहले और दूसरे दिन बचाव दलों ने 9 लोगों को मलबे से जिंदा सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
- विषैली गैसें और भारी मशीनें: मलबे के नीचे से मीथेन जैसी जहरीली गैसों का रिसाव हो रहा था और लगातार हो रही बारिश रेस्क्यू में बड़ी बाधा बन रही थी। शुरुआत में इंसानी जान बचाने की उम्मीद में पोकलेन जैसी भारी मशीनों का इस्तेमाल नहीं किया गया। लेकिन शनिवार और रविवार की सुबह तक अत्याधुनिक कंक्रीट कटर और डिमोलिशन मशीनों की मदद से मलबे को हटाया गया और बाकी बचे 8 शवों को बाहर निकाला गया। आज सुबह करीब 1:30 बजे आखिरी लापता कर्मचारी वामन कसबे (भवन के वॉचमैन) का शव मिलने के बाद ऑपरेशन खत्म घोषित किया गया।
पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे का एलान
इस दर्दनाक हादसे के बाद डिप्टी सीएम और पुणे की पालक मंत्री सुनेत्रा पवार ने घटना स्थल का दौरा कर निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं। प्रशासन की तरफ से लापरवाही बरतने वाले दोषियों पर सख्त कार्रवाई की बात कही गई है।
पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम (PCMC) ने प्रत्येक मृतक के परिवार को 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि (Ex-gratia) देने का एलान किया है। इसके साथ ही, प्लांट का संचालन करने वाली निजी कंपनी एंथनी लारा रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड ने भी पीड़ित परिवारों को 25 लाख रुपये का मुआवजा देने और पीड़ित बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने की घोषणा की है।
कचरे के ढेर के ठीक बगल में इस तरह का प्रशासनिक भवन बनाना क्या अधिकारियों और मैनजमेंट की एक बड़ी लापरवाही नहीं है? क्या भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे? नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी राय हमारे साथ ज़रूर साझा करें। देश के बड़े हादसों, लाइव अपडेट्स और हर एक कड़क व सच्ची रिपोर्ट को सबसे पहले देखने के लिए जुड़े रहिए न्यूज़ दर्शन (News Darshan) साथ।
Saumya Pal
National Desk News Darshan





