नई दिल्ली : यूरोप इस समय भीषण और ऐतिहासिक हीटवेव (भीषण गर्मी) का सामना कर रहा है। महाद्वीप के कई हिस्सों में तापमान का पारा 40°C से 45°C के पार पहुंच चुका है, जिसने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। इसी बीच, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे एक्स (X) और इंस्टाग्राम पर कुछ बेहद हैरान करने वाले वीडियो तेजी से प्रसारित हो रहे हैं। इन वीडियो में सड़कों पर लगे ट्रैफिक सिग्नलों को मोम की तरह पिघलते और नीचे की तरफ लटकते हुए देखा जा सकता है।
दावा किया जा रहा है कि आसमान से बरसती आग और अत्यधिक वायुमंडलीय तापमान के कारण ये मजबूत प्लास्टिक और मेटल के बुनियादी ढांचे खुद को संभाल नहीं पा रहे हैं और पिघल रहे हैं। लेकिन क्या वाकई यूरोप का मौसम इतना गर्म हो चुका है कि ट्रैफिक लाइट्स भी सुरक्षित नहीं हैं? इंडिया टुडे और अन्य प्रमुख फैक्ट-चेक एजेंसियों की जांच में इस सनसनीखेज दावे की पूरी सच्चाई सामने आ चुकी है।
फैक्ट चेक: क्या है वायरल वीडियो का सच?
गहन डिजिटल फोरेंसिक और रिवर्स इमेज सर्च के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि वायरल हो रहे वीडियो पूरी तरह से भ्रामक हैं। वीडियो में दिखाए गए दृश्य वास्तविक जरूर हैं, लेकिन उनका संबंध किसी भी तरह से मौजूदा मौसम या हीटवेव से नहीं है। यह वीडियो दो अलग-अलग स्थानीय दुर्घटनाओं के फुटेज को जोड़कर बनाया गया है:
- इटली का क्लिप (वेरोना) वीडियो के पहले हिस्से में एक बेहद विकृत और झुकी हुई ट्रैफिक लाइट दिखाई देती है। पड़ताल में पता चला कि यह दृश्य इटली के वेरोना शहर के लुगानियानो (Lugagnano) इलाके का है।यहां ट्रैफिक सिग्नल के पिघलने का कारण पर्यावरण का तापमान नहीं, बल्कि 23 जून को ठीक सिग्नल पोल के नीचे रुकी हुई एक कार में लगी भीषण आग थी। कार से उठी ऊंची और गर्म लपटों के सीधे संपर्क में आने के कारण ट्रैफिक लाइट का प्लास्टिक ढांचा पिघल गया था।
- जर्मनी का क्लिप (बर्लिन) वीडियो के दूसरे हिस्से में दिखाई दे रही क्षतिग्रस्त ट्रैफिक लाइट जर्मनी की राजधानी बर्लिन के फ्रीड्रिचशैन-क्रूजबर्ग (Friedrichshain-Kreuzberg) जिले की है। बर्लिन की ट्रैफिक इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी ‘इंफ्रासिग्नल’ (InfraSignal) ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया कि यह फुटेज पुराना है। जून 2025 में इस चौराहे के ठीक बगल में स्थित एक नाइटक्लब में भीषण आग लग गई थी, जिसके कारण चौराहे के पास लगे इस सिग्नल को भारी नुकसान पहुँचा था।
क्या धूप से पिघल सकता है हैवी-ड्यूटी प्लास्टिक?
वैज्ञानिक और तकनीकी दृष्टिकोण से भी सोशल मीडिया का यह दावा पूरी तरह खारिज हो जाता है। आधुनिक सड़कों और चौराहों पर इस्तेमाल होने वाले ट्रैफिक सिग्नलों का निर्माण उच्च-गुणवत्ता वाले पॉलीकार्बोनेट या विशेष औद्योगिक प्लास्टिक से किया जाता है।वैज्ञानिक मानकों के अनुसार, इस प्रकार के मैटेरियल को पिघलने के लिए कम से कम 130°C या उससे अधिक के अत्यधिक तापमान की आवश्यकता होती है। भले ही यूरोप में पारा 40°C से 45°C को छू रहा हो, लेकिन केवल धूप और हवा की गर्मी से इस तरह के इंफ्रास्ट्रक्चर का पिघलना पूरी तरह असंभव है। यह केवल सीधे तौर पर लगी आग (जैसे गाड़ी या इमारत की आग) के तीव्र तापमान के कारण ही मुमकिन है।
वास्तविक संकट: क्यों आसानी से मान लिया गया यह झूठ?
इस फर्जी और भ्रामक पोस्ट के इतनी तेजी से वायरल होने के पीछे एक बड़ी वजह है—यूरोप में वर्तमान में जारी वास्तविक जलवायु संकट। भले ही ट्रैफिक लाइट्स आग से पिघली हों, लेकिन इस समय यूरोप के बुनियादी ढांचे पर गर्मी का भारी दबाव है:
सड़कों और पटरियों पर असर: कई देशों में तीव्र गर्मी के कारण डामर (Asphalt) की सड़कें नरम पड़ रही हैं और कुछ जगहों पर रेलवे और ट्राम पटरियों के मुड़ने (Buckling) की खबरें आई हैं।
सार्वजनिक स्वास्थ्य: फ्रांस और पड़ोसी देशों में भीषण गर्मी की वजह से स्वास्थ्य आपातकाल जैसी स्थिति है, जहां लू के कारण अत्यधिक मौतें दर्ज की जा रही हैं।
इसी वास्तविक डर और संकट का फायदा उठाकर कुछ सोशल मीडिया हैंडल्स ने पुरानी और असंबंधित दुर्घटनाओं के विजुअल्स को ‘क्लिकबैट’ और सनसनी फैलाने के लिए हालिया हीटवेव से जोड़कर शेयर कर दिया। डिजिटल दौर में किसी भी ऐसी चौंकाने वाली तस्वीर पर भरोसा करने से पहले उसकी प्रामाणिकता की जांच करना अनिवार्य है।
रिया मिश्रा
नेशनल डेस्क | न्यूज़ दर्शन





